×

जय श्री राम 🙏

सादर आमंत्रण

🕊 Exclusive First Look: Majestic Ram Mandir in Ayodhya Unveiled! 🕊

🕊 एक्सक्लूसिव फर्स्ट लुक: अयोध्या में भव्य राम मंदिर का अनावरण! 🕊

YouTube Logo
श्रीराम मंदिर, अयोध्या - Shri Ram Mandir, Ayodhya
लाइव दर्शन | Live Darshan
×
YouTube Logo

Post Blog

The Incredible Story of Lord Ram

रामायण : तारा का विलाप। बालि का अन्तिम संस्कार।

रामायण : Episode 39

तारा का विलाप। बालि का अन्तिम संस्कार।

बालि मरते समय सुग्रीव से क्षमा माँग कर किष्किंधा का राज्य उसे देता है। सुग्रीव को भी पछतावा है कि उसने भाई को मरवा दिया। बालि इसे पूर्वजन्मों का दोष मानता है कि एक माँ जाए होने के बावजूद दोनों भाई साथ साथ प्रेमपूर्वक नहीं रह सके। बालि अपने गले में पड़ी इन्द्र देव की कीर्तिभ माला भी सुग्रीव को देता है। इस माला के प्रभाव से ही युद्धभूमि में बालि को अपने शत्रु की आधी शक्ति मिल जाती थी। बालि अपने पुत्र अंगद को भी सुग्रीव के हवाले करता है और अपनी पत्नी तारा का तिरस्कार न करने का वचन लेता है। तभी रानी तारा विलाप करते हुए वहाँ पहुँचती है। तारा को आशंका है कि पिता की हत्या के विक्षोभ में डूबा पुत्र अंगद, काका सुग्रीव के संरक्षण में कैसे रह पायेगा। तब बालि राम से अंगद को सुग्रीव की भाँति अपनी शरण में लेने का अनुनय करता है। बालि अंगद को उपदेश देता है कि वो सुग्रीव का विश्वासपात्र बनकर रहे और उसे ही अपना पितातुल्य माने। तारा विलाप करते हुए बालि के साथ जाने की आग्रह करती है। हनुमान उसे समझाते हैं कि उनका विलाप अनन्त पथ पर जाने को अग्रसर पति की आत्मा को वेदना पहुँचा रहा है। उन्हें शान्त चित्त से प्राण त्यागने दीजिये। बालि राम राम कहते हुए प्राण त्यागता है। क्षुब्ध तारा बालि के कलेजे से निकला बाण उठाकर राम के पास ले जाती है और कहती है कि इसी बाण से वे उसका भी अन्त कर दे। तारा कहती है कि यदि राम उसे मारेगें तो उन्हें स्त्री हत्या का पाप नहीं लगेगा बल्कि कन्या दान का पुण्य प्राप्त होगा। तारा कहती है कि राम पिता की भाँति उसे पुत्री मानें और उसके पति के पास परम धाम भेज दें। हनुमान तारा को अब अपने पुत्र अंगद के भविष्य के लिये जीने का उपदेश देते हैं। राम किष्किंधा नरेश बालि का राजकीय सम्मान के साथ अन्तयेष्टि कराते हैं। सुग्रीव का मन आत्मग्लानि से भरता है। वह राज्यसत्ता स्वीकार करने की बजाय सन्यास धारण करने की बात कहता है। राम सुग्रीव की भावनाओं की प्रशंसा करते हैं किन्तु उनके वैराग्य भाव को शमशान वैराग्य बताते हैं। राम कहते हैं कि जब भी किसी व्यक्ति के निकट सम्बन्धी की मृत्यु होती है तो उसके मन में यही शमशान वैराग्य उत्पन्न होता है किन्तु यह भाव अल्पकाल ही रहता है और वह फिर से सांसारिक गतिविधियों में लिप्त हो जाता है। अतएव सुग्रीव को इस वैराग्य भाव से बाहर आकर किष्किंधा का राज्य सम्भालना चाहिये। राम कहते हैं कि वैराग्य का भाव लिये हुआ व्यक्ति ही श्रेष्ठ राजा बन सकता है। राम सुग्रीव से अपने राज्याभिषेक के साथ अंगद को युवराज घोषित करने का परामर्श देते हैं। जामवन्त राम से सुग्रीव के राज्याभिषेक में किष्किंधा नगरी पधारने का निमन्त्रण देते हैं लेकिन राम चौदह वर्ष के वनवास में है तो वे नगर में प्रवेश से इनकार करते हैं और लक्ष्मण को सुग्रीव का राजतिलक करने के लिये कहते है।

रामायण के प्रसिद्ध पात्र

Bharata - भरत

रामायण, वेद व्यास द्वारा रचित एक महाकाव्य है जो दुनियाभर में मान्यता प्राप्त है। यह काव्य आदिकाव्य के रूप में जाना जाता है और राम-लक्ष्मण-सीता की कथा को बताता है। रामायण में विभिन्न महान पात्रों की उपस्थिति होती है, और उनमें से एक महत्वपूर्ण पात्र है भरत। भरत रामचंद्र जी के चारों भाइयों में से एक है और काव्य के चरित्रों की महत्ता को दर्शाने वाले अहम पात्रों में से एक है।

भरत का वर्णन करते समय, उसके भावुक और नरम हृदय की गुणवत्ता का उल्लेख किया जाता है। वह एक न्यायप्रिय और धर्मपरायण राजकुमार है, जिसे अपनी माता की और उसके पिता की उपासना करने की गहरी इच्छा होती है। भरत को अपने भाइयों के लिए गहरा प्रेम होता है और उन्हें राजसी ताज के लिए वापस आने की प्रार्थना करता है। उसका उदात्त और विनम्र स्वभाव उसे दूसरों की भलाई के लिए समर्पित बनाता है।

भरत को उनके पिता का आदर्श राजा के रूप में देखा जाता है। उसे राज्य प्रशासन की कला का बहुत अच्छा ज्ञान होता है और वह धर्मप्रियता, न्याय, और न्याय की आदान-प्रदान को प्रमाणित करता है। भरत का राजधर्म के प्रति आदर्श और समर्पण उसे एक महान शासक के रूप में स्थानांतरित करता है।

भरत का विचारशील और धार्मिक स्वभाव उसे एक महान पुरुष के रूप में प्रमाणित करता है। वह अपने भ्राताओं की नरमता और भगवान राम की प्रेमपूर्ण भूमिका को समझता है और उन्हें सम्पूर्ण भरोसा देता है। भरत के लिए परिवार का महत्व अत्यंत महत्त्वपूर्ण होता है और वह अपने पिता के साथ जीने का व्रत लेता है।

भरत को उनके भाइयों की उपस्थिति के बिना कोई सुख नहीं मिलता है। उनके विदेशी वनवास के दौरान, भरत अपने भाइयों की वापसी की इच्छा को पूरा करने के लिए अग्नि की उपासना करता है और उन्हें अपने पाद प्रणाम करता है। उनका विश्वास है कि राजसी ताज सिर्फ उनके भाइयों के चरणों में ही स्थान पाता है और वह इसे धर्मप्रियता के प्रतीक के रूप में देखता है।

भरत को राज्य के प्रति अपना प्रेम दिखाने के लिए भी प्रस्तुत किया जाता है। उन्हें राम की अभावित राज्य-आपूर्ति को पूरा करने के लिए प्रबंध करना पड़ता है और वह अपनी प्रतिष्ठा और गरिमा को एक तरफ रखकर राज्य की भलाई के लिए कार्य करता है। भरत को अपनी उच्चतम सामर्थ्य के कारण प्रशासनिक कुशलता का बहुत अच्छा ज्ञान होता है और वह अपनी विश्वासयोग्यता को प्रमाणित करता है।

भरत को रामायण में एक महत्वपूर्ण पात्र के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जिसका प्रेम, भक्ति, और धर्मानुसार आचरण सभी के द्वारा प्रशंसा किया जाता है। उसकी उपस्थिति रामचंद्र जी के लिए महत्वपूर्ण होती है और उसके धर्मप्रिय और न्यायप्रियता के गुणों को प्रशंसा करती है। उसके संयमित और समर्पित चरित्र को देखकर लोग उसे एक प्रेरणादायक उदाहरण मानते हैं।



Ram Mandir Ayodhya Temple Help Banner Sanskrit shlok
Ram Mandir Ayodhya Temple Help Banner Hindi shlok
Ram Mandir Ayodhya Temple Help Banner English shlok

|| सिया राम जय राम जय जय राम ||

News Feed

ram mandir ayodhya news feed banner
2024 में होगी भव्य प्राण प्रतिष्ठा

श्री राम जन्मभूमि मंदिर के प्रथम तल का निर्माण दिसंबर 2023 तक पूरा किया जाना था. अब मंदिर ट्रस्ट ने साफ किया है कि उन्होंने अब इसके लिए जो समय सीमा तय की है वह दो माह पहले यानि अक्टूबर 2023 की है, जिससे जनवरी 2024 में मकर संक्रांति के बाद सूर्य के उत्तरायण होते ही भव्य और दिव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जा सके.

ram mandir ayodhya news feed banner
रामायण कालीन चित्रकारी होगी

राम मंदिर की खूबसूरती की बात करे तो खंभों पर शानदार नक्काशी तो होगी ही. इसके साथ ही मंदिर के चारों तरफ परकोटे में भी रामायण कालीन चित्रकारी होगी और मंदिर की फर्श पर भी कालीननुमा बेहतरीन चित्रकारी होगी. इस पर भी काम चल रहा है. चित्रकारी पूरी होने लके बाद, नक्काशी के बाद फर्श के पत्थरों को रामजन्मभूमि परिसर स्थित निर्माण स्थल तक लाया जाएगा.

ram mandir ayodhya news feed banner
अयोध्या से नेपाल के जनकपुर के बीच ट्रेन

भारतीय रेलवे अयोध्या और नेपाल के बीच जनकपुर तीर्थस्थलों को जोड़ने वाले मार्ग पर अगले महीने ‘भारत गौरव पर्यटक ट्रेन’ चलाएगा. रेलवे ने बयान जारी करते हुए बताया, " श्री राम जानकी यात्रा अयोध्या से जनकपुर के बीच 17 फरवरी को दिल्ली से शुरू होगी. यात्रा के दौरान अयोध्या, सीतामढ़ी और प्रयागराज में ट्रेन के ठहराव के दौरान इन स्थलों की यात्रा होगी.