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श्रीराम मंदिर, अयोध्या - Shri Ram Mandir, Ayodhya
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The Incredible Story of Lord Ram

रामायण : सुग्रीव का राज्याभिषेक। अंगद बने युवराज। भोग विलास में डूबे सुग्रीव।

रामायण : Episode 40

सुग्रीव का राज्याभिषेक। अंगद बने युवराज। भोग विलास में डूबे सुग्रीव।

किष्किंधा के राजमहल में सुग्रीव का राज्याभिषेक होता है। राजनर्तकिया अभिनन्दन गीतों पर नृत्य करती हैं। लक्ष्मण सुग्रीव को राजमुकुट पहनाते हैं। सुग्रीव ऋष्यमूक पर्वत पर बैठे राम के पास जाकर उनके चरणों में अपना राजमुकुट रखते हैं और आभार व्यक्त करते हैं। सुग्रीव और उनके मंत्रियों के साथ राम की मंत्रणा होती हैं। सुग्रीव माता सीता की खोज तत्काल प्रारम्भ करना चाहते हैं। किन्तु राम कहते हैं कि वर्षा ऋतु में वानरों के लिये यह कार्य दुष्कर होगा अतएव वे चतुर्मास बीतने के उपरान्त सीता की खोज प्रारम्भ करने का सुझाव देते हैं। लक्ष्मण चार मास तक भाभी सीता के कष्ट भोगने को लेकर चिन्तित होते हैं। वर्षा ऋतु प्रारम्भ होती है। सीता अशोक वाटिका में वृक्ष के नीचे भीगते हुए बिना छाया के रहती हैं। वर्षा ऋतु में उन्हें विरह पीड़ा भी है। सीता को मिथिला की पुष्प वाटिका का वो दिन याद आता है जब उन्होंने पहली बार राम को देखा था। अपने विवाह का हर प्रसंग याद कर वे विह्वल होती हैं। उधर राम भी कम विचलित नहीं हैं। चन्द्रमा की शीतलता उन्हें जला रही है। सीता की रक्षा न कर पाने की उन्हें ग्लानि है। यह वर्षा अयोध्या में भी विरह की पीड़ा लेकर आयी है। भरत ,भाई राम की चरण पादुका के समक्ष उन्हें स्मरण कर दुखी है। माता कौशल्या पुष्पथाल लिये महल के झरोखे से पुत्र की राह निहार रही है। लक्ष्मण और उर्मिला भी विरह पीड़ा में हैं। धीरे धीरे चतुर्मास बीत जाता है। हनुमान और जामवन्त चिन्तित हैं कि महाराज सुग्रीव अपने अन्तःपुर में भोग विलास में डूबे हैं और उन्हें रामकाज की याद भी नहीं है। सुग्रीव के इस बर्ताव पर राम और लक्ष्मण भी क्रोधित हैं। राम सुग्रीव से बात करने के लिये लक्ष्मण को किष्किंधा भेजते हैं।

रामायण के प्रसिद्ध पात्र

Jatayu - जटायु

रामायण में जटायु एक महत्वपूर्ण पात्र है जो योद्धा और वानर वंश का सदस्य है। वह एक गरुड़ विशेष का प्रतिनिधित्व करता है, जो सूर्य और वायु देवताओं के बेटे के रूप में प्रस्तुत होता है। जटायु का नाम उसकी बाहुओं के झुलसने के लिए उन्हें एक झूला जैसा आकार देने वाले विशेष पट्टों से प्राप्त हुआ है।

जटायु एक महान स्वतंत्र जीवी हैं, जो पहाड़ों और जंगलों में घूमते रहते हैं। वह बड़े पंखों और संचालन क्षमता वाले मुखवाले के साथ एक विशाल शरीर हैं जो उसे ऊँची ऊँची उड़ानें भरने की क्षमता प्रदान करता है। जटायु के पंख पीले और धूसर रंग के होते हैं, जिनमें धूप के बीजों के समान चमक होती है। उसकी आंखें तेज और प्रज्वलित होती हैं, जैसे कि वह अस्त चमक और तपती धूप के सामर्थ्य का प्रतीक है।

जटायु को उसकी विशेष बुद्धिमत्ता के लिए भी पहचाना जाता है। वह बहुत ही ज्ञानी और सत्यनिष्ठ हैं, और उसका विचारधारा परम धर्मवत सत्य के आधार पर निर्मित है। जटायु ने अपना जीवन वीरता और निष्ठा के साथ बिताया है और उसकी प्रामाणिकता और निष्ठा के कारण वह अपने वंश के बीच मान्यता प्राप्त करता है।

जटायु की प्रमुख भूमिका रामायण में समय आती है, जब राम, सीता और लक्ष्मण वनवास के दौरान रावण द्वारा हरण किए जाते हैं। जब राम और लक्ष्मण रावण की खोज में निकलते हैं, तो जटायु उन्हें देखकर वन में दौड़ता है और रक्षा के लिए आगे आता है। वह रावण के साथ लड़ता है और उसकी विपरीत बल से जूझता है, लेकिन दुःख के साथ, उसे हार का सामना करना पड़ता है।

जटायु के महान कर्तव्य के बीच, उसके पास परमात्मा राम का दर्शन होता है। राम उसके पास जाते हैं और जटायु के शरण में अपनी दुःखभरी कथा सुनते हैं। जटायु राम को उसकी प्राणों की गाथा बताता है और उसे द्वंद्व निद्रा में से जगाकर रक्षा करता है। जब जटायु इस युद्ध में मारा जाता है, तो राम उसे अपने आवागमन के लिए सलामी देते हैं और उसकी महिमा को मान्यता देते हैं।

जटायु का पात्र रामायण में एक महत्वपूर्ण प्रतीक है, जो विशेष रूप से सेवा और बलिदान का प्रतीक है। उसकी प्रमाणिकता, त्याग, और शक्ति दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। जटायु ने धर्म की रक्षा के लिए अपना सब कुछ समर्पित किया और अपनी वीरता और विश्वास के कारण एक महान योद्धा के रूप में याद किया जाता है।



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|| सिया राम जय राम जय जय राम ||

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2024 में होगी भव्य प्राण प्रतिष्ठा

श्री राम जन्मभूमि मंदिर के प्रथम तल का निर्माण दिसंबर 2023 तक पूरा किया जाना था. अब मंदिर ट्रस्ट ने साफ किया है कि उन्होंने अब इसके लिए जो समय सीमा तय की है वह दो माह पहले यानि अक्टूबर 2023 की है, जिससे जनवरी 2024 में मकर संक्रांति के बाद सूर्य के उत्तरायण होते ही भव्य और दिव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जा सके.

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रामायण कालीन चित्रकारी होगी

राम मंदिर की खूबसूरती की बात करे तो खंभों पर शानदार नक्काशी तो होगी ही. इसके साथ ही मंदिर के चारों तरफ परकोटे में भी रामायण कालीन चित्रकारी होगी और मंदिर की फर्श पर भी कालीननुमा बेहतरीन चित्रकारी होगी. इस पर भी काम चल रहा है. चित्रकारी पूरी होने लके बाद, नक्काशी के बाद फर्श के पत्थरों को रामजन्मभूमि परिसर स्थित निर्माण स्थल तक लाया जाएगा.

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अयोध्या से नेपाल के जनकपुर के बीच ट्रेन

भारतीय रेलवे अयोध्या और नेपाल के बीच जनकपुर तीर्थस्थलों को जोड़ने वाले मार्ग पर अगले महीने ‘भारत गौरव पर्यटक ट्रेन’ चलाएगा. रेलवे ने बयान जारी करते हुए बताया, " श्री राम जानकी यात्रा अयोध्या से जनकपुर के बीच 17 फरवरी को दिल्ली से शुरू होगी. यात्रा के दौरान अयोध्या, सीतामढ़ी और प्रयागराज में ट्रेन के ठहराव के दौरान इन स्थलों की यात्रा होगी.